युवाओं के लिए खास
चाहे जितना भी कमाओ,
जैसा मर्जी पहनो खाओ,
पर याद रखना अपना ये फर्ज निभाना है,
सिर पे चढ़ा मातृ भूमि का कर्ज चुकाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का कर्ज चुकाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का --------------
खूब ही पंख लगाओ अपने अरमानों को,
जज्बा पैदा करो तोड़ने का चट्टानों को,
मेहनत करके हमने ऊँचा रुतबा पाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का -------------
नजरे उम्मीद से देखे सबको एहसास है,
भावी पीढ़ी से भारत माँ को बहुत आस है,
नौजवानों ने ही देश का भार उठाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का --------रैना"
चाहे जितना भी कमाओ,
जैसा मर्जी पहनो खाओ,
पर याद रखना अपना ये फर्ज निभाना है,
सिर पे चढ़ा मातृ भूमि का कर्ज चुकाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का कर्ज चुकाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का --------------
खूब ही पंख लगाओ अपने अरमानों को,
जज्बा पैदा करो तोड़ने का चट्टानों को,
मेहनत करके हमने ऊँचा रुतबा पाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का -------------
नजरे उम्मीद से देखे सबको एहसास है,
भावी पीढ़ी से भारत माँ को बहुत आस है,
नौजवानों ने ही देश का भार उठाना है।
कर्ज चुकाना है भारत माँ का --------रैना"
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