Tuesday, June 2, 2015

मेरे लिये तेरे पास फुरसत नही है,
इन्तजार की मेरी आदत नही है।
अच्छा होता इस बार ही मिलते,
बार बार मिलती मोहलत नही है।
तेरे सिवा ओर कोई चाहे हमको,
इतनी अच्छी मेरी सूरत नही है।
हर महफ़िल में सिर्फ तेरी चर्चा,
अपनी शहर में शोहरत नही है।
तेरे शहर में हर शै मिल जाती है,
फ़क़त मिलती मोहब्बत नही है।
इस कद्र रैना"का दिल न तोड़ता,
लगता तुझको मेरी जरूरत नही है। रैना"

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