हाल से बेहाल अनबुझे सवाल के जैसे,
अपने हाल सरकारी हस्पताल के जैसे।
अपने हिस्से में तो आते फकत आंसू,
हम तो निशानी ए यार रुमाल के जैसे।
किसी ने लगाई ही नही हमारी कीमत,
हम कबाड़ में खरीदे गये माल के जैसे।
गीते जिन्दगी भला सुर में गा ले कैसे,
है बेवजन बेबहर बेसुरी ताल के जैसे।
सोचा करते संग उनके खेलेंगे होली,
मिलेंगे उनसे हम तो गुलाल के जैसे।
अफ़सोस खुद की खरीद फरोख्त करे है,
"रैना"के हाल कोठे के दलाल के जैसे। "रैना"
अपने हाल सरकारी हस्पताल के जैसे।
अपने हिस्से में तो आते फकत आंसू,
हम तो निशानी ए यार रुमाल के जैसे।
किसी ने लगाई ही नही हमारी कीमत,
हम कबाड़ में खरीदे गये माल के जैसे।
गीते जिन्दगी भला सुर में गा ले कैसे,
है बेवजन बेबहर बेसुरी ताल के जैसे।
सोचा करते संग उनके खेलेंगे होली,
मिलेंगे उनसे हम तो गुलाल के जैसे।
अफ़सोस खुद की खरीद फरोख्त करे है,
"रैना"के हाल कोठे के दलाल के जैसे। "रैना"
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