Thursday, September 3, 2015

उल्फ़त में नसीब है तन्हाई,रो रो के गुजारा करते हैं,
वो दर्दे दिल सुनते नही,हम जिनको पुकारा करते हैं।
चलता न जोर नसीबों पे,जो लिख छोड़ा वो मिलता है,
काटे कुछ वीराने में,कुछ बहारों का नजारा करते हैं।
दोस्त मेरे इतने अच्छे,मेरी ख़ुशी न उनको गवारा है,
सुख में मेरे साथ चले,दुःख मिलते किनारा करते हैं।
मेरे हमदम प्यारे साथी ने,दिल का घर है तोड़ दिया,
पर मेरा दिल न माने,उनकी आरती उतारा करते हैं।
हाये रैना"वो भी रूठ गया,किसी और पे न भरोसा है,
बेशर्म है हम मरते नही,वो रोज कत्ल हमारा करते है। रैना"


  

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