Wednesday, September 16, 2015



नाम तेरे  करी ख़ुशी अपनी,
दे मुझे आंख की नमी अपनी।

जाम पीना बनी नही आदत,
हैं नशे में यही कमी अपनी।
चल दिये छोड़ कर अकेला ही,
सांस अब तक नही थमी अपनी।
क्यों पलट के नही देखा उसने,
यूं जवानी नही ढली अपनी।
रात भर कौन खूब रोया है,
आंख तब ही नही लगी अपनी।
हम दगा तो कभी नही करते,
फिर भला क्यों नही जमी अपनी।
सोचना इसलिये जरूरी है,
जिन्दगी तो कटे भली अपनी।
क्यों खफ़ा हो दुखी बता रैना"
बात किससे नही बनी अपनी। रैना"

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