Sunday, September 6, 2015


++फ़िलबदीह - 95 - (06 सितम्बर 2015)++
हटा परदा दिखा जलवा कभी तू,
पता मुझको नही माने अभी तू,
नही हिम्मत मिरी शिकवा करू जो,
गधा हूं मैं तिरे दर का नबी तू। "रैना"

नसीबों को तकाजा है तभी हम
गिला करते नही उनसे कभी हम,
कभी बदल जाये यकीं है,
लगे है
लकीरें हाथ की देखे अभी हम,

No comments:

Post a Comment