कर्म करती मिरी माता सुनो बिगड़ी बना देती,
कली मुरझा गई हो जो उसे भी माँ खिला देती,
फर्क करती नही माता गले सबको लगाती है,
दुःखो का नाश करती माँ नसीबों को जगा देती।
एक बार बोलो दो बार बोलो,
शांति मिलेगी सौ बार बोलो,
बोलो जयकारा वैष्णो रानी का,----बोलो सच्चे दरबार की जय,
मेरी माँ जग कल्याणी का ------बोलो जय जय माँ ----रैना"
सुप्रभात जी --------------------------जय जय माँ
कली मुरझा गई हो जो उसे भी माँ खिला देती,
फर्क करती नही माता गले सबको लगाती है,
दुःखो का नाश करती माँ नसीबों को जगा देती।
एक बार बोलो दो बार बोलो,
शांति मिलेगी सौ बार बोलो,
बोलो जयकारा वैष्णो रानी का,----बोलो सच्चे दरबार की जय,
मेरी माँ जग कल्याणी का ------बोलो जय जय माँ ----रैना"
सुप्रभात जी --------------------------जय जय माँ
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