याद तेरी जान की दुश्मन बनी,
दिल नही अब मानता खुद से ठनी।
हाथ की उलझी लकीरें देखते,
हम बनेंगे क्या नसीबों के धनी।
हम किसी से क्या लड़ेगे किसलिये
चल रही खुद से अभी जब तनतनी।
जा रहे है हमनवा ही छोड़ कर,
मौत ही आ जाये जो इस से भली।
आंख मेरी नम हुई है दिल जला,
बात तेरी बज्म में जब भी चली।
दिल हुआ बेताब मिलने के लिये,
मन के घर रैना"मची है खलबली। रैना"
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