2 1 2 2 2 1 2 2 2 1 2 2 2 1 2
आम हो या ख़ास कोई बात करता जाम की,
जिन्दगी बेचैन भटके आरजू है दाम की।
रात काली होने वाली है खबर उसको भली,
बेचता अल्ला कहीं बोली लगाये राम की।
आम हो या ख़ास कोई बात करता जाम की,
जिन्दगी बेचैन भटके आरजू है दाम की।
रात काली होने वाली है खबर उसको भली,
बेचता अल्ला कहीं बोली लगाये राम की।
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