प्रतिभा मंच फ़िलबदीह कार्यक्रम
1222 1222 122 2 1222
किये वादें हमें अक्सर निभाने याद रहते हैं,
लगे ऐसा तुझे हरदम बहाने याद रहते हैं।
कभी भूला नही करते मिले जो इश्क सौगातें,
जो गुज़रे हैं रंजूरी में जमाने याद रहते है।
चढ़ी परवान मोहब्बत को आसां भूलते जाना,
हुई बरबाद उल्फ़त के फ़साने याद रहते है।
न कोई याद ही करता कभी बरबाद शहरों को,
यहां आबाद गुलशन के तराने याद रहते हैं।
कभी मन की नही माने परेशानी तभी होती,
उसे पीड़ा न जिसको दिन पुराने याद रहते हैं।
चले रैना"यहां कोई न अपना दर्द समझेगा,
न भूले हम कभी अपने ठिकाने याद रहते है। रैना"
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किये वादें हमें अक्सर निभाने याद रहते हैं,
लगे ऐसा तुझे हरदम बहाने याद रहते हैं।
कभी भूला नही करते मिले जो इश्क सौगातें,
जो गुज़रे हैं रंजूरी में जमाने याद रहते है।
चढ़ी परवान मोहब्बत को आसां भूलते जाना,
हुई बरबाद उल्फ़त के फ़साने याद रहते है।
न कोई याद ही करता कभी बरबाद शहरों को,
यहां आबाद गुलशन के तराने याद रहते हैं।
कभी मन की नही माने परेशानी तभी होती,
उसे पीड़ा न जिसको दिन पुराने याद रहते हैं।
चले रैना"यहां कोई न अपना दर्द समझेगा,
न भूले हम कभी अपने ठिकाने याद रहते है। रैना"
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