जिसकी तलाश में हम भटकते रहे,वो पास था मेरे उसको पा न सके,
गैरों को गले से लगाया दौड़ दौड़ कर,अपनों को अपना बना न सके।
ख्वाब देखना तो सबका मिजाज है,मैंने भी कसर कोई छोड़ी ही नही,
अफ़सोस हमको यही तो मलाल है,ख्वाब कोई हम क्यों सजा न सके।
यूं दस्ताने इश्क हमने पढ़ी है बहुत,सोचा भी बहुत करेंगे हम बन्दगी,
परवाना बनने की हिम्मत न हुई,शमा के करीब भी हम जा न सके।
गैरों को गले से लगाया दौड़ दौड़ कर,अपनों को अपना बना न सके।
ख्वाब देखना तो सबका मिजाज है,मैंने भी कसर कोई छोड़ी ही नही,
अफ़सोस हमको यही तो मलाल है,ख्वाब कोई हम क्यों सजा न सके।
यूं दस्ताने इश्क हमने पढ़ी है बहुत,सोचा भी बहुत करेंगे हम बन्दगी,
परवाना बनने की हिम्मत न हुई,शमा के करीब भी हम जा न सके।
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