दोस्तों भला ये जो हिंदी के लिये ज्यादा शोर मचाते हैं,
जरा ये पता करो कितनों के बच्चे हिंदी स्कूल में जाते हैं,
ये भी कड़वा सच है जिसे हजम करना अति मुश्किल है,
ऐसे हिंदी प्रेमी प्रात सुप्रभात नही गुड मॉर्निग फरमाते हैं।
क्योकि इन के प्यारे बच्चे अंग्रेजी स्कूल में जो जाते है,
अध्यापक उन्हें हिंदी में नही अंग्रेजी में इंटेलिजेंट बनाते है।
वैसे इन बच्चों के अभिभावक हिंदी के लिए जोर लगाते है,
दूसरों के बच्चों को हिंदी स्कूल में अवश्य भिजवाते है,
मंचों पर हिंदी का गुणगान करते चम्मचागिरी में माहिर,
तभी तो हिंदी प्रेमी का सर्वोत्तम इनाम हथिया ले जाते है।
गर ऐसा होता रहा मातृभाषा हिंदी कोने में सिसकती रह जाएगी,,
अंग्रेजी शहरों को कब्जे में कर के फिर गाँव में भी चली आएगी। रैना"
जरा ये पता करो कितनों के बच्चे हिंदी स्कूल में जाते हैं,
ये भी कड़वा सच है जिसे हजम करना अति मुश्किल है,
ऐसे हिंदी प्रेमी प्रात सुप्रभात नही गुड मॉर्निग फरमाते हैं।
क्योकि इन के प्यारे बच्चे अंग्रेजी स्कूल में जो जाते है,
अध्यापक उन्हें हिंदी में नही अंग्रेजी में इंटेलिजेंट बनाते है।
वैसे इन बच्चों के अभिभावक हिंदी के लिए जोर लगाते है,
दूसरों के बच्चों को हिंदी स्कूल में अवश्य भिजवाते है,
मंचों पर हिंदी का गुणगान करते चम्मचागिरी में माहिर,
तभी तो हिंदी प्रेमी का सर्वोत्तम इनाम हथिया ले जाते है।
गर ऐसा होता रहा मातृभाषा हिंदी कोने में सिसकती रह जाएगी,,
अंग्रेजी शहरों को कब्जे में कर के फिर गाँव में भी चली आएगी। रैना"
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