Monday, September 14, 2015

वैसी दुनिया हरगिज नाहीं,जैसी हमको दिखती है,
रंग बिरंगी बड़ी बदरंगी,स्वार्थ जहां वही टिकती है।
चोर उच्चकें मौज करे है कैसा समय अब आया है,
झूठ मुनाफे का सौदा है सच की तो मंदी पिटती है।
बेटी बचाओ मुहिम चली है अजन्मी न मारे कोई,
दहेज की बली चढ़ती फिर क्यों कोठे पे बिकती है।
देश की जनता भोली भाली बहकाने से बहक जाये,
सपनों के जो महल दिखावे उसको कुर्सी मिलती है।
मर्द पढ़े अक्सर जुमला ये नारी घर की लक्ष्मी है,
हालत देखो बदतर बेचारी कई पाटों में पिसती है।
अंधे पीसे कुत्ते खाये अब कोई न किसी को रोके है,
दुनिया भेड़ चल पड़े पीछे मजबूत लाठी जिसकी है।
रैना"जिंदगी रास न आई चलो अपने घर को चलते,
पी मिलन को तरसे आंखे प्यास न मन की मिटती है।" रैना"





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