काश जल्दी से तेरा आना होता
लौट कर फिर देर से जाना होता।
खूब दिल की बात तो कर लेते हम,
खुश हो खाये गर ज़हर खाना होता।
दीन दुनिया से उसे क्या लेना है,
हाल अपने से जो बेगाना होता।
वो खफ़ा तो बाग़ होता वीराना,
है चमन उसने ही महकाना होता।
कैद परिंदे गर उड़े तो कैसे यारों,
लौट कर तो फिर वहीं आना होता।
गर जमाना मान ले तो है अच्छा,
सुख दे करआराम सुख पाना होता।
रैन को हरपल तलब है सुबह की,
देखते कब दूर अन्धेरा होता।रैना"
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