न जाने क्यों वो हमसे बात नही करते,
कभी खुल कर वो मुलाकात नही करते,
बंजर धरती तड़फे दो बूंदों के लिये ही,
बहारे बरखा में भी बरसात नही करते। रैना"
रहम रहने दे मुझे दीवाना कर दे,
मुझे अपने हाल से बेगाना कर दे,
शमा बन के तू जली मुद्दतों से,
कर्म कर मुझको परवाना कर दे। रैना"
बेवजह दिन रात जला न कर,
अन्धेरी राहों पे यूं चला न कर,
हो बहुत मुश्किल उस शहर में,
बख्श खुद को तो छला न कर। रैना"
बेशक रैना"मेरा हरपल इस कलम के नाम हो गया है,
लफ्जों के सागर में गोतें लगाना मेरा काम हो गया है। रैना"
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