Thursday, September 17, 2015

सूरज ने ली जब अंगड़ाई,
किरणों ने चादर सरकाई,
पंछी उड़ने गाने लगते,
गुलशन में खुश्बू महकाई।
कानों में बजती शहनाई।
मुझको लगता है तू आई।
चोटें जिसने भी हैं खाई।
मेरे हिस्से में तन्हाई।



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