वो पास हैं मेरे फिर भी उसको न पा सके हैं,
हम बदनसीब खुद को न अपना बना सके हैं।
ख़्वाब देखना फ़ितरत हमने कसर न छोड़ी,
अफ़सोस तो यही न कोई ख्वाब सजा सके हैं।
इश्क है इबादत सोचा हम भी करेंगे बन्दगी,
परवाना हम बने न पास शमा के जा सके हैं।
साहिल पे डूबे कश्ती भाग्य कहे या मेहनत,
जाग के काटे रातें,पर न नसीब जगा सके हैं।
बिस्मिल हुआ है दिल ये हासिल फकत रोना,
हाले दिल सुनाये न सीना चीर दिखा सके हैं। "रैना"
हम बदनसीब खुद को न अपना बना सके हैं।
ख़्वाब देखना फ़ितरत हमने कसर न छोड़ी,
अफ़सोस तो यही न कोई ख्वाब सजा सके हैं।
इश्क है इबादत सोचा हम भी करेंगे बन्दगी,
परवाना हम बने न पास शमा के जा सके हैं।
साहिल पे डूबे कश्ती भाग्य कहे या मेहनत,
जाग के काटे रातें,पर न नसीब जगा सके हैं।
बिस्मिल हुआ है दिल ये हासिल फकत रोना,
हाले दिल सुनाये न सीना चीर दिखा सके हैं। "रैना"
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