नसीबों से यही शिकवा गिला मुझको,
जिसे चाहा नही अक्सर मिला मुझको,
तबीबो से शिकायत है यही कहते,
नही आये कभी देने दवा मुझको।
मेरी फितरत इबादत में लगे रहना,
नही चाहत मिले कोई सिला मुझको।
भला जिसका किया हमने यही सच है,
पड़ा मौका दिया उसने दगा मुझको।
फ़िदा तुझ पे मिरा ये दिल उड़ा जाये,
नही आती समझ ये क्या हुआ मुझको।
कहानी अब बने कोई यही हसरत,
मिले रैना"हसीं दोस्त खुदा मुझको। रैना"
जिसे चाहा नही अक्सर मिला मुझको,
तबीबो से शिकायत है यही कहते,
नही आये कभी देने दवा मुझको।
मेरी फितरत इबादत में लगे रहना,
नही चाहत मिले कोई सिला मुझको।
भला जिसका किया हमने यही सच है,
पड़ा मौका दिया उसने दगा मुझको।
फ़िदा तुझ पे मिरा ये दिल उड़ा जाये,
नही आती समझ ये क्या हुआ मुझको।
कहानी अब बने कोई यही हसरत,
मिले रैना"हसीं दोस्त खुदा मुझको। रैना"
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