हम बड़े खुश्क मिजाज है,यूं कह सकते बेलिहाज है,
तभी कोई कवि अपने गिरोह में शामिल नही करता। रैना"
बेवकूफ रैना"तो यूं ही कलम घिसाता है,
कवियों की श्रेंणी उसका नाम न आता है,
आजकल उच्च श्रेणी कवि वो कहलाता है,
रैना"जो बेहतर ढंग से रचनायें चुराता है।
फिर चतुराई से उसमें अपना नाम टेप कर,
रचना सीना तान कर मंच पे पढ़ जाता है। रैना"
तभी कोई कवि अपने गिरोह में शामिल नही करता। रैना"
बेवकूफ रैना"तो यूं ही कलम घिसाता है,
कवियों की श्रेंणी उसका नाम न आता है,
आजकल उच्च श्रेणी कवि वो कहलाता है,
रैना"जो बेहतर ढंग से रचनायें चुराता है।
फिर चतुराई से उसमें अपना नाम टेप कर,
रचना सीना तान कर मंच पे पढ़ जाता है। रैना"
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