Tuesday, September 8, 2015

मुझे गम ने सताया है नही अब नींद आंखों में,
बड़ी मुश्किल घड़ी आई जले दिल खूब रातों में।
नही आता नजर कोई जिसे दिल की कहे अपनी,
इनायत कौन कर देगा बसा है झूठ बातों में।
चले जाते नही रुकता कभी कोई बहाने से,
यही दस्तूर जग का है बचे सुनसान हाथों में।
नही तूने करी चिन्ता कटेगी रात मुश्किल में,
कुआं खाली बचा गम ही तलाशे खाक खातों में।
कहर बरपा शहर दिल का नही कायम रहा हमसे,
कमी अपनी रही कोई बगावत आज सांसों में।
हवा चलती धुआ उठता जले दिल का घरौंदा है,
कमी रैना"नसीबों की हुये शामिल निराशों में। रैना"

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