तू रंग बदलना छोड़ दे गिरगट हैं परेशान बहुत,
गीदड़ लोमड़ी देख के तुझको हो रहे हैरान बहुत।
टोपी तिलक लगाये माहिर खिलाड़ी प्रवचनों के,
भारत देश में बन गये देखों स्वभू भगवान बहुत।
कपड़ों की कोई बात नही आंखों में न शर्म रही,
ऊँची ऊँची दुकानों का अब फीका पकवान बहुत।
मानुष की हरकत देख जानवर भी शर्मा जाये,
हवसी कामी क्रोधी अब बन गया शैतान बहुत।
भाई भतीजे वाद ने अब गुणवत्ता पे डाका डाला,
हाथों में डिग्रियां लिये भटक रहे गुणवान बहुत।
बुजुर्गों की सेवा करनी अब बहू बेटे ने छोड़ दी है,
वैसे सतसंग में जाये करे गुरु का ध्यान बहुत।
देश धर्म की ठेकेदारी अख़बारों में होती मशहूरी,
ढोंगी निपट फरेबी की अब चलती दूकान बहुत।
जिंदगी चार दिनों की थी दो दिन बचे है बाकी,
रैना"उससे जोड़े ले तारें वर्ना दुखी हो जान बहुत।रैना"
गीदड़ लोमड़ी देख के तुझको हो रहे हैरान बहुत।
टोपी तिलक लगाये माहिर खिलाड़ी प्रवचनों के,
भारत देश में बन गये देखों स्वभू भगवान बहुत।
कपड़ों की कोई बात नही आंखों में न शर्म रही,
ऊँची ऊँची दुकानों का अब फीका पकवान बहुत।
मानुष की हरकत देख जानवर भी शर्मा जाये,
हवसी कामी क्रोधी अब बन गया शैतान बहुत।
भाई भतीजे वाद ने अब गुणवत्ता पे डाका डाला,
हाथों में डिग्रियां लिये भटक रहे गुणवान बहुत।
बुजुर्गों की सेवा करनी अब बहू बेटे ने छोड़ दी है,
वैसे सतसंग में जाये करे गुरु का ध्यान बहुत।
देश धर्म की ठेकेदारी अख़बारों में होती मशहूरी,
ढोंगी निपट फरेबी की अब चलती दूकान बहुत।
जिंदगी चार दिनों की थी दो दिन बचे है बाकी,
रैना"उससे जोड़े ले तारें वर्ना दुखी हो जान बहुत।रैना"
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