तेरे दर के भिखारी हैं कर्म फिर भी नही करती,
मेरी माँ तुम खफा हो क्यों कभी झोली नही भरती,
परेशानी है बड़ी मुश्किल भला जाये कहां जाये,
बिना तेरे मेरी माता कभी बिगड़ी नही बनती। रैना"
मेरी माँ तुम खफा हो क्यों कभी झोली नही भरती,
परेशानी है बड़ी मुश्किल भला जाये कहां जाये,
बिना तेरे मेरी माता कभी बिगड़ी नही बनती। रैना"
No comments:
Post a Comment