की खता दिल लगा के देख लिया,
दर्द अपना बना के देख लिया।
मानते ही नही वो बात मेरी
दिलरुबा को मना के देख लिया।
मौत आई न यूं जतन तो किया,
ज़हर कल रात खा के देख लिया।
बात बनती नही कहे तो किसे,
राज उनको बता के देख लिया।
क्यों नसीबा मेरे उठे ही नही,
अलबत्ता यूं जगा के देख लिया।
खूब बदली हुये मिजाज तिरे,
घर नया भी बसा के देख लिया।
काश रैना"मेरा हिसाब करे,
प्यार में सब लुटा के देख लिया। रैना"
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