Monday, September 21, 2015

है सारा जहाँ तेरा,
फिर भी न कोई घर है,
क्या खूब अन्दाज,
बेघर तू बड़ा जादूगर है,रैना"

सूरज ने ली जब अंगड़ाई,
किरणों ने चादर सरकाई,
पंछी उड़ने गाने लगे जब,
गुलशन में खुश्बू महकाई।
तेरी याद आई,याद तेरी आई। 
कानों में बजती शहनाई।
मुझको लगता है तू आई।
चोटें जिसने भी हैं खाई।
उसके हिस्से में तन्हाई।
तेरी याद आई,याद तेरी आई। रैना"

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