Friday, April 24, 2015




हम तेरे शहर में आये हैं भटकने के लिये,
सिर्फ चिंता की फांसी पे लटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -------------------------
राह से अनजान है हम न मंजिल का पता,
बांहें फैलाये खड़ी देख के मुस्कराये खता,
लाखों तैयार हुई कलियाँ चटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -----------------------
रिश्तें नीलाम हुये हैं इमान मंडी में बिके,
ऐसा वो दिल ही नही जैसा खूब चेहरा दिखे 
रोना है तन्हा को यार सब मटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -----------------------------
खूब हसीन होता तब मंजर जब वो शाम ढ़ले,
छोड़ के झूठ की दुनिया पंछी जब घर को चले,
इतने मायूस हुये आंसू न बचे टपकने के लिये। 
हम तेरे शहर में -------------------------------
खाये हैं धोखे बहुत खुद पे भी भरोसा न रहा,
रैना"की क्या बात करू जैसा था वैसा न रहा,
बेहतर होगा दे दे उसे जहर तू घटकने के लिये। रैना"




हम तेरे शहर में आये हैं भटकने के लिये,
सिर्फ चिंता की फांसी पे लटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -------------------------
राह से अनजान है हम न मंजिल का पता,
बांहें फैलाये खड़ी देख के मुस्कराये खता,
लाखों तैयार हुई कलियाँ चटकने के लिये।
 हम तेरे शहर में -----------------------


कामयाबी  के कुछ जरूरी टिप्स

गर कामयाब हो के दिखाना है,
तो फिर इतना फर्ज निभाना है,
वर्ना कामयाबी आधी अधूरी है,
अब मेहनत के साथ चम्मचागिरी भी जरूरी है।
गर चम्मचागिरी से कदम पीछे ह्टाओगे,
फिर तो स्टेशन बदलते नजर आओगे।
बातें ज्यादा न बनानी चाहिए,
बॉस के सामने दो के साथ चार लगानी चाहिए।
एक और आसान काम किया जाये,
नौकरी आसां होगी बॉस की बीवी को पटा लिया जाये।
तुम पशु प्रेमी हो इससे कभी न इंकार करो,
अपने बच्चों से ज्यादा बॉस के कुत्ते से प्यार करो।
रिश्वत का काम सुनियोजित ढंग से रवा होना चाहिए,
सरकारी वेतन तो बदस्तूर बैंक में ही जमा होना चाहिए।
बाद मुद्द्त मुझे भी ये बात समझ आई है,
नौकरी पेशे वालों की वेतन ही ईमानदारी की कमाई है। रैना'"
जय जय खींच के रखो काम। 
तेरे खत जला के हवा  कर दुगा,
मैं दिल से तुझको जुदा कर दुगा,
तेरे बिन जीना हो जाये मुश्किल,
वक्त से पहले हस्ती फना कर दुगा। रैना"


कभी कभार मुलाकात कर लिया करो,
साथ रहते हो कोई बात कर लिया करो,
इधर उधर तो अक्सर बरसते रहते हो,
मेरे घर ख़ुशी की बरसात कर लिया करो।रैना"

Thursday, April 23, 2015

क्या खूब हसीन अदा छलकता पैमाना है,
हुस्ने मलिका तू मोहब्बत का खजाना है।
तस्वीर तेरी सादगी का ही जिकर करती,
जो देखे वो अपने हाल से हुआ बेगाना है। रैना" 
 चिंता न कर कोई चिंता न कर,
कर दे गी भव से पार,
माँ वैष्णो पे कर एतबार,
 तेरी विनती करेगी स्वीकार,
तेरे जन्मों का होगा सुधार।
कर देगी भव से ----------
चिंता न कर -----------

बुझते शोले को हवा दे गया कोई,

फिर जीने की बददुआ दे गया कोई।

दीद-ए-सनम तो हो जाने थे रैना"

,
मुझ मरते को दवा दे गया कोई।रैना"
बुझते शोल को हवा दे गया कोई,
जीने की बददुआ दे गया कोई।
मिलने की तलब पूरी हो जाती,
मुझ मरते को दवा दे गया कोई।रैना"

बुझते शोलों को हवा दे गया कोई,
जीने की बददुआ दे गया कोई।
सनम से मिलने की तलब पूरी होती,
मुझ मरते को क्यों दवा दे गया कोई।
अफ़सोस गम मुझे यही मलाल रहा,
अपना कह कर भी दगा दे गया कोई। 

Wednesday, April 22, 2015

सोचते कुछ ओर तो हो रहा कुछ ओर है,
ये घड़ी मुश्किल बड़ी चले न दिल पे जोर है। 
डोर रिश्तों की टूट कर इधर उधर है उड़ गई,
प्यार मन में न रहा बेवजह का शौर है।
इश्क में मुश्किल बड़ी अब वफ़ा मिलती नही,
किस से गिला शिकवा करे बेवफा ये दौर है।
रात होनी वाली है तू सोच ले रैना अभी,
उठ मुसाफिर चल दिये क्यों न करता गौर है। "रैना"
गर कलम से उल्फ़त न होती,
फिर इतनी बुरी हालत न होती,
महफ़िल में जलवे होते अपने,
यूं तन्हाई से मोहब्बत न होती। रैना"




तन्हा तन्हा जिंदगी का सफ़र,
अपनी भी कोई रहती न खबर।
लफ्जों से हरपल खेलते रहना,
कर देना सब उसके ही नज़र।
महफ़िल में एहसासे तन्हाई,
होने लगे जब शायरी का असर।
मन में उलझन बैचनी रहती,
किसी के दीद को तरसे नजर।
इतनी आसां नही मंजिल पाना,
मुश्किल बहुत इश्क की डगर।
आइना कहता देख मेरी हालत,
सुन रैना"अब तू खुद भी संवर। रैना"  
छलकते रहते आँखों के पैमाने,
तू न जाने दर्द मेरा तू न जाने,
अपनी किस्मत से गिला मुझको,
दूर खड़ी देती रहती हैं ताने।
तू न जाने दर्द मेरा तू --------रैना"

होशो हवाश भी खोने लगोगे,
मुझको जान के रोने लगोगे।
बदल लोगे रास्ता ही अपना,
किसी और के होने लगोगे। रैना"

हीरा हूँ लेकिन मेरी कीमत नही कोई,
मुझको खुद से भी उल्फ़त नही कोई,
ये जमाना मुझको समझता नही है,
अफ़सोस तभी मेरा दोस्त नही कोई। रैना"


इसलिए खफा मुझसे खुदाई है,
सच कहता ये मुझ में बुराई है। रैना"
माँ वैष्णो  तेरी जय जय कार,
माँ अम्बे तेरी जय जय कार,
दर्शन की अभिलाषा वैष्णो माँ,
अर्ज करो स्वीकार,
माँ वैष्णो तेरी जय जय कार-----
तेरी जय जयकार -----------
आँखों से आश्रु  धारा बहती,
मन में इक उलझन से रहती,
इन्तजार में बैठे तेरी करना हमें दीदार। 
तेरी जय जय कार---माँ वैष्णो तेरी ------
सुप्रभात जी --------जय जय माँ 






फूल तो फूल हैं महकेंगे जरूर,
बाग में पंछी तो चहकेंगे जरूर,
है खता नही किसका ये कसूर,
दिल जवानी में बहकेंगे जरूर। रैना"
इश्क मोहब्बत की बातें अच्छी लगती सिर्फ किताबों में,
लाखों हीरे उझड़ गई दुखी बह गये हैं रांझें शराबों में।
कहना जितना आसान हुआ करना उतना ही मुश्किल है,
जिन्दगी उलझ कर रह जाती सवालों और जवाबों में।रैना"


Tuesday, April 21, 2015

जिंदगी भर चैन मजा लिया जाये,
गर इश्क हकीकी ही किया जाये।
इश्क मुहब्बत का झूठा शौर मचा,
आशिक को इनाम गम दिया जाये।
हुस्न की गली में बैठा दीवाना पूछे,
जख्मे इश्क को कैसे सिया जाये।
सूली पे चढ़ा आशिक फरियाद करे,
नाम मेरे महबूब का न लिया जाये।  
मीरा कहती जहर अमृत हो जाता,
रैना"गर नाम का जाम पिया जाये। रैना"
09416076914 
उसके दर पे सिर झुकाने की जरूरत क्या है,
जब वो समझता ही नही मोहब्बत क्या है,
गर उसको गुमां हो गया है अपनी हस्ती का,
एहसास करवा दो उसे रैना"उल्फ़त क्या है। रैना"

तेरी अदाओं ने तुझे मशहूर कर दिया है,
ऐसा भी लगता कभी मगरूर कर दिया है,
हम तो हरदम तेरी खुशामत में लगे रहते,
पर तूने  रैना"से खुद को दूर कर दिया है।रैना"

चिराग को जला के खुले आँगन में रख दो,
देखते है हवा से कितनी देर टकराता है। रैना" 
 ये जलवा माँ मेरी अजीब कर दे,
तू बदली माँ मेरे नसीब कर दे,
बेमतलब का मैं भटक रहा हूं,
अपने चरणों के मुझको करीब कर दे। रैना"
सुप्रभात जी ------------जय जय माँ 
जिन्दगी से बस निभाने की सोचते हो,
यहां से ईंट उठा वहां लगाने की सोचते हो,
दूसरे पर क्या गुजरेगी तुम्हे क्या लेना,
तुम तो अपनी खाल बचाने की सोचते हो। रैना"


सहर की तलब में अंधेरों से दोस्ती कर ली,
आशिकों का क्या जब चाह बंदगी कर ली।

अपने आप से लड़ते रहेंगे हम,
तमाम उम्र इबादत 
दोस्तों हम सब के लिए कुछ ख़ास

तीन घण्टें की जिंदगानी है,
पहला पचपन,दूसरा घण्टा जवानी है,
तीसरा बुढ़ापा,शाम ढल जानी है।
जिंदगी की यही कहानी है।
उसकी मर्जी से आनी जानी है।
पांच तत्वों से बना पुतला,
आकाश धरती अग्नि हवा पानी है।
कहने को यहां सारे अपने,
सच ये हर शै गैर बेगानी है।
जानता ये घर नही अपना,
रैना"फिर भी करता नादानी है।रैना"
शुभ सांध्य -----जय जय माँ 

Monday, April 20, 2015

मेरी माँ की कृपा से यारों मेरा गुलशन है गुलजार हुआ,
मैं भूल गया सारे दुःख चिंता मुझे खुद से भी प्यार हुआ,
मन मंदिर को सजा लिया मैंने माँ को इसमें बैठाया है,
माँ पे इतना भरोसा है रैना" भवसागर से भी पार हुआ। रैना"
सुप्रभात जी ---------------------------जय जय माँ


वो खफा है न जाने क्यों,
मैंने तो ऐसा कुछ भी कहा नही। रैना"

वो शख्स अजीब है ,
दूर हो कर भी दिल के करीब है।रैना"

यहां कोई नही किसी का  मैं जानू तू जाने,
झूठ सब किस्से कहानी झूठे है अफ़साने। 
फरेब कर किसी को बहकाना नही चाहिये,
झूठ के सहारे तो दिल लगाना नही चाहिये,
दुआ बददुआ अपना अपना काम करती है,
रैना"सुख देना पर दिल दुखाना नही चाहिये। रैना"

इंतजार में उम्मीद के दीप जला के रखते है,
मन मन्दिर में हम तुझको बैठा के रखते है,
तुम मेरे क़रीब हो हरपल एहसास सा होता है,
खुली आँखों में तेरी तस्वीर सजा के रखते है। रैना"

जिन्दगी को नया मोड़ देना मुश्किल है,
कश्ती को भंवर में छोड़ देना मुश्किल है,
रैना"तेरे संग बांध दी है चाहत की डोरी,
उस डोरी को बीच में तोड़ देना मुश्किल है। रैना"

इश्क में कहानियां होती रहती है,
तन्हा बैठी जवानियां रोती रहती है,
बदले दौर में उल्फ़त फरेबी हो गई,
राँझें कहीं हीरे मजे में सोती रहती है। रैना"

हम ख्वाबों के महल तो सजाया नही करते,
गम देने वालो को अपना बनाया नही करते,
झूठ बोलना अपनी तौहीन समझते है हम,
अन्याय के सामने सिर झुकाया नही करते।रैना"

अपनी आँखों का रंग कभी लाल नही करते,
हो जाये गुस्ताखी तो फिर मलाल नही करते,
दूसरों का गम सहना तो अपनी पुरानी आदत,
अपनी जान का हम कभी ख्याल नही रखते। रैना"

इश्क का न कोई पूछता हाल है,
हर किसी को हुस्न का ख्याल है,
रैना"किसी से क्यों करता गिला,
जमाने की कुछ ऐसी ही चाल है। रैना"

dost mai iske sath

पत्रकारों की दुखत कहानी,पत्रकार की जुबानी,
 दोस्तों आप से  अनुरोध है
ज्यादा से ज्यादा इस पोस्ट को शेयर करे। युवाओं के भविष्य का सवाल है

दोस्तों मुझे ये बताने में हो रहा भयंकर कष्ट है,
अधिकतर भारत का मिडिया हो गया भरष्ट है।
अधिकतर अख़बार पत्रकार नही गुर्गे ढूंढते है,
फिर गुर्गे सारा दिन पैसे बोतल और मुर्गे ढूंढते है।
कुछ गुर्गे खुद को बड़ा खतरनाक पत्रकार बताते है,
ऐसे बेचारे बॉस की सीटें ही बुक करते नजर आते है।
देखिये बेइंसाफी वेतन फोर्थ क्लास से भी कम देते है,
रौब झड़ते बदले में चौबीस घंटें दबा कर काम लेते है।
ये जुल्म भी करते रौब से कहते विज्ञापन ले कर आओ,
उस में से अपना वेतन काट लो बाकी के जमा कराओ।
विडम्बना देखिये जो समाज का करता पोषण है ,
वो दुखी उसका बुरा हाल निरंतर हो रहा शोषण है।
 इन बेचारो पे बॉस अक्सर अपना हुक्म चलाते है,
दिवाली के दिन किस्मत के मारो से डिब्बे मंगवाते है।
जो स्वाभिमानी दिवाली के दिन डिब्बा नही पंहुचाता है,
उपसम्पादक महोदय फिर उसकी खूब रेल बनाता है।
डिब्बा न मिलने का उपसम्पादक खूब बदला लेता है,
कोई बहाना बना कर पत्रकार को निकलवा भी देता है।
वैसे सरकार ने ऐसी कोई नौकरी अब तक बनाई नही है,
पर पत्रकार 17 साल नौकरी करने के बाद भी स्थाई नही है।

निसंदेह बॉस तो मौके बेमौके अपने देते खूब सफाई है,
मगर सच ये पत्रकार बकरा बॉस खूंखार निर्देयी कसाई है।
सोचो इस हालत में पत्रकार ईमानदारी कैसे निभायेगे,
यदि ईमानदारी निभायेंगे तो बच्चें भूखे मर जायेगे।
इसलिये मोदी जी आप से अनुरोध है कुछ हिम्मत दिखाये,
फटेहाल पत्रकारों पर कृपा कर उन्हें मेहनताना दिलवाये।
जब तक भरष्ट मिडिया से देश को छुटकारा नही मिलेगा,
तब तक भ्र्ष्टाचार विरोधी मुहीम को सहारा नही मिलेगा।
युवाओं आप की मर्जी हमारा फर्ज है आप को  समझाना,
भूल कर भी मिडिया लाइन को अपना भविष्य न बनाना।
वर्ना रैना"की तरह जिन्दगी भर खुद को कोसोगे पछताओगे,
बाहर सूखे सलूटों की बौछार घर बीवी बच्चों की गालियां खाओंगे। रैना"
 


नाम तेरे ये जिन्दगी कर जाये तो अच्छा,
डूब कर तेरी आंखों में मर जाये तो अच्छा,
तड़फते रहते पल भर भी चैन नही मिलता,
तेरी इजाजत हो अपने घर जाते तो अच्छा। रैना"  

वैसे मुहब्बत का मचा हुआ शोर है,
आँख यहां पर दिल तो कहीं ओर है,
भूल के भी किसी से दिल न लगाना,
दिल के तहखाने में बैठा हुआ चोर है। रैना" 

Sunday, April 19, 2015

हम तुम्हारे दिल से निकल जायेगे,
लगता निकलते ही फिसल जायेगे,
फिर कभी सोचते है तन्हा बैठ कर,
रैना"संभलते संभलते संभल जायेगे। रैना"
न जाने लोगो की क्या मजबूरी होती,
जुगनू से उल्फ़त आफताब से दूरी होती,
आखिर ये लोग क्यों नही समझ पाते हैं,
चमकने को आफ़ताब की लौ जरूरी होती। रैना"
देख जमाने की फितरत इतने हैरान न हो,
बेनूर हुई है फिजा इस कदर परेशान न हो,
वक़्त अपनी रफ़्तार से चलता ही रहता है,
मौसम का क्या ये तो बदलता ही रहता है। रैना"

बेशक इंसान जीता ताउम्र नादानी में है,
लेकिन समझता कौन कितने पानी में है,
कविता आप ने कविता को महकाया है,
लोगों ने तभी तुम्हे पलकों पर बैठाया है। रैना"

साथ मेरे ही रहता है,
सुनता कुछ न कहता है,
इतना तो है पता मुझे,
मेरा दुःख वो सहता है।
करता कोई कसूर नही,
जुदाई उसे मंजूर नही,
जो भी उसका हो जाता,
उससे जाता दूर नही।
नाम उसका हर रोज ले,
उसे अपने अंदर खोज ले,
जीवन सफल हो जाये,
रैना"मौज ले फिर मौज ले। रैना"


इन अदाओं का दीवाना कौन न होगा,
विश्वामित्र की क्या मजाल जो पानी मांग जाये। रैना"

इक तेरे ही हुस्न के चर्चे है,
सरे शहर में जलजला सा आया है। रैना"

इलाज के लिए दवाखाना ढूंढते ढूंढते,
सकून के लिए बुतखाना ढूंढते ढूंढते,
किसी को मन का जहाँ नही मिलता,
इन्सां भटक जाता ठिकाना ढूंढ्ते ढूंढते। रैना"
 सुप्रभात जी---------------जय जय माँ

साथ मेरे ही रहता है,
सुनता कुछ न कहता है,
इतना तो है पता मुझे,
मेरा दुःख वो सहता है।
करता कोई कसूर नही,
जुदाई उसे मंजूर नही,
जो भी उसका हो जाता,
उससे जाता दूर नही।
नाम उसका हर रोज ले,
उसे अपने अंदर खोज ले,
जीवन सफल हो जाये,
रैना" ले फिर मौज ले। रैना"
अब हर किसी को हसीं सूरत चाहिये,
सुर्खी सफेद माटी की सी मूरत चाहिये,
 अपना अन्दाज कुछ अलग है दोस्तों,
चेहरा नही हमें दिल खूबसूरत चाहिये। रैना"



कविता तुम खुद कविता जैसी,
तेरे हुस्न की महकी खुशबू ऐसी।
शेर कविता ग़ज़ल ने जादू किया,
सब को तेरा दीवाना बना दिया।
तेरे चाहने वाले बेशुमार हो गये,
ग्रुप में दीवाने आठ हजार हो गये।
ये ग्रुप इसलिये बन गया खास है,
सिर्फ जोशी जी का विशेष प्रयास है। रैना" 
सारा शहर ही है मेरे जैसा,
कोई नही है यहां तेरे जैसा,
काली रात मैं अंधेरे जैसा,
तू फूटती किरण सवेरे जैसा। रैना"

हम व्यवस्था सूधारने के लिए जोर तो लगाते हैं,
क्या करे तीन में से पांच चम्मचें निकल जाते हैं,
जो काले अंग्रेजों से मिल कर फिर कहर ढाते है,
1947 से पहले  के दिन फिर से याद कराते हैं। रैना"


Saturday, April 18, 2015


माँ के भवन के नजारें खूब लगते प्यारे प्यारे हैं,
लाल झंडे उच्चे झूले,देखो गूंज रहे जय कारें है।
देव देवा दरबान खड़े,
ब्रह्मा शिव विष्णु भगवान खड़े,
आदिशक्ति माँ बख्शनहारी,
भिखारी रैना'से नादान खड़े।
जय जय माँ जय जय माँ
वैष्णो माँ --------रैना"



जो भी जितना बांटता है,
उसको उतना मिलता है,

हम सूफी उसके दीवाने,
कोई माने न माने,
हम उसके दीवाने। रैना"
सुप्रभात जी ----जय जय माँ

दुनिया से हमने क्या लेना,
हम उसकी रजा में राजी है,
क्यों हम ऐसी चर्चा करे,
वो पुजारी ऐसा काजी है। रैना"



पान सुपारी ध्वजा नारियल,
हाथों में फूलों के हार माँ वैष्णो, 
भक्त खड़े हैं तेरे द्वार माँ वैष्णो,
माँ से बच्चे कुछ ओर न मांगे,
दर्शन दो इक बार माँ वैष्णो। 
भक्त खड़े हैं --------------
जग कल्याणी हो माँ वरदानी,
भक्तों की तूने ही पीरा है जानी,
ये भी करो उपकार माँ वैष्णो। 
दर्शन दो इक ------------
भक्त खड़े हैं -----------
सुन लो मईया तुम अर्ज हमारी,
भक्त दीवाने बैठे शरण तिहारी,
विनती करो स्वीकार माँ वैष्णो। 
दर्शन दो इक ----------
भक्त खड़े हैं --------------रैना"
सुप्रभात जी ---------जय जय माँ 

दर्द तुझको भी होता होगा,
याद कर के तू रोता होगा।
रात भर कानों में बजे घंटी,
नींद गहरी तू न सोता होगा।
मेरी आँखों से बरसे बदली,
सिरहाना तू भिगोता होगा।
दूसरों  को दुःख देने वाला,
खुद भी गम ही ढोता होगा।
हाल से बेहाल गर हुये हम,
होश हवास तू खोता होगा।
काटना तो वैसा ही पड़ता,
रैना"जैसा जो बोता होगा। रैना"



मुझसे भूले न मेरी बस्ती,
मन में मेरे मेरी मां बसती।
याद आती दिल में दर्द होता
बेमौसम तब आंख बरसती।
कितनी बदली है क्या बताऊ,
मौत महंगी हुई जान सस्ती। 
चिठ्ठी पाती न खैर ख़बर है,
अम्मा हाथ में फ़ोन रखती। 
अच्छे लगते इस कदर खुदा की कसम,
किसी की लगे न नजर खुदा की कसम।
तुम कहां रहता किधर तुझसे क्या पूछे,
मेरे दिल में है तेरा घर खुदा की कसम 
मेरे बारे में कोई भी बात नही करता,
महफ़िल में तेरा ज़िकर खुदा की कसम।
तुझको देख के आइना भी शर्मा जाये,
ये तुझको तो नही ख़बर खुदा की कसम।
राहे इश्क पे सम्भल सम्भल के चलना,
बड़ी ही मुश्किल है डगर खुदा की कसम।
तेरे महल चौबारे वहां इक उजड़ी बस्ती,
मुफ्लिश रैना"रहता उधर खुदा की कसम। रैना"
मुझसे भूले न मेरी बस्ती,
मन में मेरे मेरी माँ बसती।
याद आती दिल मेंदर्द होता 

Friday, April 17, 2015

जज तो आप बने बैठे थे,
अब फैसला मुझ पे छोड़ दिया। रैना"

अच्छे लगते हो इस कदर खुदा की कसम,
लगे न किसी की नजर खुदा की कसम।
मेरे बारे में कोई बात भी नही करता,
महफ़िल में तेरा ज़िकर खुदा की कसम।
तुझको देख के आइना भी शर्मा जाये,
ये तुझको तो नही ख़बर खुदा की कसम।
राहे इश्क पे सम्भल सम्भल कर चलना,
बड़ी ही मुश्किल है डगर खुदा की कसम।
तेरे महल चौबारे वहां इक उजड़ी बस्ती,
मुफ्लिश रैना"रहता उधर खुदा की कसम। रैना"
मेरी माँ का द्वारा सारे जग से न्यारा,
जो दर पे आये उसका चमके सितारा,
रैना"खुद पे तू उपकार करले,
चमने जिंदगी गुलजार करले,
दीदार करले आ दीदार करले,
माँ वैष्णो रानी के दीदार करले। रैना"

यूं गुजरे जाती जिन्दगानी ऐसी, पढ़े दुनिया लिख दे कहानी ऐसी। वर्ना उम्र भर छुप छुप के रोना है, कर न देना कोई नादानी ऐसी। दो दिन की मुकाम हासिल कर ले, लौट के न आये फिर जवानी ऐसी। वैसे हम तो कब थे इसके काबिल, उसने फिर भी करी मेहरबानी ऐसी। बाद तेरे भी जिक्र हो महफ़िल में, छोड़े जा रैना" कोई निशानी ऐसी। रैना"
09416076914

रात भर रोने की सजा मत देना, जान ले लेना पर दगा मत देना। मौत होती है आखिरी मंजिल, तू मुझे जीने की दुआ मत देना। बुझ चुके इश्क के दहके शॉलें, ठंडी राख को अब हवा मत देना। दर्द दिल का अब सहना मुश्किल, मेरे मौला मुझको कजा मत देना। रैना" की गुजरे इबादत में बाकी, तू आतिशे इश्क बुझा मत देना।रैना" 09416076914
रात भर रोने की सजा मत देना,
जान ले लेना पर दगा मत देना। 
 मौत होती है मंजिल आखिरी,
तू मुझे जीने की दुआ मत देना। 
बुझ चुके इश्क के दहके शॉलें, 
ठंडी राख को अब हवा मत देना।
दर्द दिल का अब सहना मुश्किल,
मेरे मौला मुझको कजा मत देना। 
रैना" की गुजरे इबादत में बाकी,
तेरी मर्जी उसको मजा मत देना।रैना" 
09416076914 

नर्म दिल कब शिकार करते है,
आशिक दीवाने ही प्यार करते है,
दिल पे लगे लाखों जख्म रैना"
टूटे दिल कब इजहार करते है। रैना"

नसीब को गिला हो सकता है लेकिन,
हम नसीब से गिला कर नही सकते। रैना"

Thursday, April 16, 2015

कविता तू लाजवाब  न्यारी है,
तेरी हर अदा दिलकश प्यारी है।
तू इस लोक की नही रहने वाली,
खुदा ने जन्नत से परी उतारी है।
तेरे हुस्न के चर्चे हर महफ़िल में,
कामनी ने तेरी जुल्फें संवारी है।
मिश्री सी घोलती मिठ्ठी वाणी,
सच कातिल मुस्कान तुम्हारी है।
कविता जब तुम कहती कविता,
वाह वाह कहती  दुनिया सारी है।
दिलजलों की नज़र से बचाने को,
हम ने कई बार तेरी नजर उतारी है। 
हमको भी रख ले अपने कदमों में,
रैना"कहता बस  ये अर्ज हमारी है। रैना" 
दिल की गली से गुजर कर तू जाती,
तेरी हर अदा मेरी रूह को छू जाती। रैना"

 तू मेरी आरजू  हो जा,
तमन्ना जुस्तजू हो जा,
फूल सी ये जिंदगी मेरी,
तू फूल की खुशबू हो जा। रैना"

करेले से कड़वे अकड़े बहुत हैं,
हुस्न वालोँ के नख़रे बहुत है,
बराड़ा वासियों के नाम रैना का पैगाम 

नगरपालिका की आई बहार बराड़ा में,
प्रयास की हुई जय जय कार बराड़ा में।
भाजपा वाले भी हो गये खुश हैं बहुत,
बनेगी अब अपनी ही सरकार बराड़ा में। 
पानी की निकासी का होगा समाधान,
तंग भी बहुत है अब बाजार बराड़ा में। 
जितने खुश हैं उतने ही होगे भी दुखी,  
उठक पटक होगी कई बार बराड़ा में। 
उपमंडल बना फिर भी फर्क न पड़ा,
रैना"अब कुछ तो होगा सुधार बराड़ा में। रैना"



तुझको अपना सबकुछ ही हासिल है,
फिर भी क्यों भटके जैसे पागल है।
उसकी मरजी से तय है सब होना, 
वो कर सकता करने के काबिल है। 
मैं गुस्ताखी अक्सर करता रहता,
क्यों मेरी हर हरकत में शामिल है।
मैं खुद का दुश्मन खुद को ही लूटे,
मतलब के खातिर इन्सां जाहिल है।
कैसे किसको दोषी कह दे "रैना"
हर कोई खुद ही खुद का कातिल है। रैना" 






















जिंदगी मौत की और चलती है,
तुम खफा हो जान निकलती है।
ये नजारा तो तुम भी देख लेना,
धीरे धीरे ये दुखी शाम ढलती है।
तेरा चेहरा कड़क हम कैसे देखे,
तेरी  आंखों से आग बरसती है।
रात हुई न कोई महफ़िल जमी,
फिर मासूम शमा क्यों जलती है।
जोशी तो तेरा आशिक दीवाना है,
माफ़ करदो जो हमारी गलती है।जोशी "
यूं गुजरे जाती जिन्दगानी ऐसी,
पढ़े दुनिया लिख दे कहानी ऐसी।
वर्ना उम्र भर छुप छुप के रोना है,
कर न देना तू कोई नादानी ऐसी।
दो दिन की मुकाम हासिल कर ले,
लौट के न आये फिर जवानी ऐसी।
वैसे हम तो कब थे इसके काबिल,
उसने फिर भी करी मेहरबानी ऐसी।
बाद तेरे भी जिक्र हो महफ़िल में,
छोड़े जा रैना"तू कोई निशानी ऐसी। रैना"   

Wednesday, April 15, 2015

नरेश चन्द्र जोशी जी शान में

 हम को दिया मान सम्मान सत्कार जोशी जी,
भूलना मुश्किल आप का ये उपकार जोशी जी।
फूल खिलें हैं लाखों फिर भी वीरान है ये गुलशन,
आप ही ला सकते हो जीवन में बहार जोशी जी।
लिखना हुई इबादत लिखते गुजरी ये जिन्दगी,
हमें कलम से मोहब्बत सच्चा प्यार जोशी जी।
मतलब है तभी तो फ़िदा हम दिलो जान से,
ये आप भी जानते मतलबी है संसार जोशी जी।
रैना"को बचाना मायूसी उदासी के बुरे दौर से,
आप कर लेना विनती अर्ज स्वीकार जोशी जी। रैना"

जनहित में जारी
आ आ आ ------
लौट के आ जा राहुल वीर,
तुम्हे कांगेसी बुलाते है,
बदलो पार्टी की तकदीर,
तुम्हे कांग्रेसी बुलाते हैं।
आ आ -----लौट -----
शीला दीक्षित ने हेकड़ी दिखाई,
तेरी प्रतिष्ठा को क्षति पहुंचाई,
दुखी आँखों से बहता है नीर।
तुम्हे कांगेसी बुलाते है।
आ आ --लौट के ------रैना"
मकसद से दूर भटक रहे वीराने में,
घना अन्धेरा है दिल के तहखाने में। रैना"

दिल लेना पर दिल न देना दुनिया की ये आदत है,
मतलब के लोग हैं सारे फ़क़त मतलब से उल्फ़त है। रैना"

कुछ ऐसे गुजरे जिंदगी,
जब चले?????
तो लोग कहे जाने न देंगे। रैना"

बिन पानी मछली से अक्सर तड़फते हैं,
याद में खो जाते तो फिर नैन बरसते हैं,
इक तुम हो राजे दिल भी कहते ही नही,
मुद्दत से वो सुनने को मेरे कान तरसते है।रैना"

दिल के गहरे सागर में उतर कर????
आप ने खोजे लफ्जों के मोती,
फिर कविता अच्छी कैसे न होती। रैना"

तू हाले दिल का जिकर करदे,
क्या विचार है जरा ख़बर करदे,
इक मुद्दत से वीराने में कट रही,
हो मेहरबानी कर्म की नजर करदे। रैना"

उड़ने दो दिल को रोका न करो,
मेरे बारे में तुम सोचा न करो,
मैं तो हूं गिरती मीनार के जैसे,
यूं खुद से तुम धोखा न करो। रैना"

मेरी बरबादियों का जश्न मना लेना,
लेकिन पहले जनाजा तो निकलने दे। रैना"

अपनी भी आजकल चाय की दुकान है,
किस्मत का क्या न जाने कब पलटी खा जाये। रैना "

बिन पानी मछली से अक्सर तड़फते हैं,
याद में खो जाते नैन बादल से बरसते हैं,
इक तुम हो राजे दिल भी कहते ही नही,
मुद्दत से वो सुनने को मेरे कान तरसते है।रैना"

 क्या तुम्हारे दिल में दर्द होता है,
बता दो न तुम्हे किसने रोका है, 
हर किसी से न कहना राजे दिल,
जान लेना ये दुनिया तो धोखा है। रैना"

पि मिलन की आस में तडफत है दिन रैन,
मन मरुस्थल में भटके इक भी पल न चैन,
इक भी पल न चैन बात कछ्छू समझ न आवे,
बंसीधर घनश्याम से मोहे अब कौन मिलावे। रैना"

Tuesday, April 14, 2015

खुदा की देन उल्फ़त होती,
यूं न किसी से मुहब्बत होती,
दिल अपना रोल अदा करता,
सिर्फ आँखों की न शरारत होती। रैना"

तेरा मेरा कोई वास्ता न रहा,
तेरे दिल से मेरा रास्ता न रहा,
अब चैन से कट जायेगा सफर,
होने वाला कोई हादसा न रहा। रैना"

हाल मेरा पूछते क्यों नही,
मेरे बारे सोचते क्यों नही,
ख्वाब में क्यों तंग करते,
खुद को तुम रोकते क्यों नही। रैना"

बोलते नही हमारी खता क्या है,
ये बताओ तुम्हारी रजा क्या है,
गर हमसे कोई हो गई गल्ती,
उस गल्ती की रैना"सजा क्या है। रैना"

लिख दिया तेरा नाम दिल पे,
तेरी मर्जी ?????
सम्भालना या तोड़ देना,
हमें क्या लेना। रैना"

वो दिल क्या जो वफ़ा न करे,
फर्ज दोस्ती का अदा न करे,
जान दे दे हँसते हँसते जीतू,
दोस्त से कभी दगा न करे। जीतू "
काश तुम आसां मेरा सफ़र करते,
मेरी तरफ रहमत की नज़र करते।
हम भी पलकों पे तुम्हे सजा लेते,
हर महफ़िल में तेरा जिकर करते।
मांगते दुआ लगे न तुझे गर्म हवा,
सजिदे में रहते तेरा फ़िकर करते।
इक मैं दूजा तेरी दीवानगी होती,
हम मजे में जिन्दगी बसर करते।
दीद के खातिर खुली रहती आंखें,
दीवानों की आदत रैना"सबर करते। रैना" 
दोस्तों मुझे आप सब  को ये बताने में ख़ुशी हो रही की आज फेसबुक पर मुझे एक नेक दिल महान इंसान से मिलने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है। इन का नाम है (Joshi Nareshchnadra)जोशी नरेश चन्द्र जी जो  Dr Kavita 'kiran' fans/friends group के एडमिन है। पहले इनसे ग्रुप के माध्यम से बात हुई फिर फोन पर बात कर सुखद अनुभव का एहसास हुआ।
जैसे उन्होंने मेरा मार्ग दर्शन किया मैं उनका सदैव आभारी रहुगा। जोशी जी आप अपना सहयोग ऐसे ही बने रखे।          
मुद्दत से इक दोस्त की तलाश थी,
परेशान मेरी जिन्दगी निराश थी,
आप मिले तो चंहु और ख़ुशी छाई,
बहार खुद चल कर मेरे करीब आई। रैना" 

दोस्ती के रिश्ते अजीब होते हैं,
दोस्त दूर हो के भी करीब होते है,
जिनका दोस्त प्यार नही होता,
रैना"वो तो बड़े बदनसीब होते है। रैना"

मुक्तक-लोक ' तरंगिनी '

बेशक अब तो खून हमारा,होने लगा है पानी,
तभी तो हम सब भूल रहे,शहीदों की कुर्बानी.
याद करो उन्हें याद करो,भूलो न उनको याद करो,
आजादी के दीवानों को,कुर्बान हुए परवानों को,
याद करो,याद करो ----------------
धुप देखी न छाव देखी,न देखे पावं के छाले,
भारत माँ को मुक्त करवाने, निकल पड़े मतवाले.
भूखे प्यासे आगे बढ़ते , भारी गम पर उफ़ न करते,
देश प्रेम की लगन लागी,हंस के लगा दी जान की बाजी.
याद करो उन्हें याद करो-----------------
काल सुनहरी भरी जवानी, फिर भी मन की एक न मानी,
अपना सुख दुःख भूल भुला के,माँ की पीड़ा समझी जानी,
इच्छा अरमां कर के दफ़न, सर पर बांध लिया था कफ़न,
मचला खून सर चढ़ कर बोला,मइया रंग दे बसंती चोला.
याद करो उन्हें याद करो-------------------------
देख फंदे को मन था झुमा,हंस-हंस के फंसी को चूमा,
वीरों का उत्साह देख कर,दुश्मन का फिर सर था घूमा,
बेशक रोये बहन माँ भाई, हिम्मत में पर कमी न आई,
शहीदों की कुर्बानी रंग लाई, अंग्रेजों ने मुहु की खाई,
15 अगस्त का दिन आया, लाल किले पर तिरंगा फहराया,
लाल किले पर तिरंगा लहराया.शहीदों ने उदघोष किया,
भारत माता की जय---- याद करो उन्हें याद करो---------रैना"
अहसास मुझको तू पास मेरे,
फिर भी नही है क्यों चैन पल भी।  रैना"
aehsas mujhko tu pas mere,
fir bhi nhi hai kyo chain pal bhi,रैना"




एक दिन प्रात ही प्रात मेरी बीवी सतावें असमान पर चढ़ गेई,

मुझसे मुखातिव हो कर एक शेर जड़ गेई.

कहने लगी वाह मेरी किस्मत,मुझे तो बस यही गम है,

जहा मेरी नाव डूबी, वहा पानी बहुत कम है.

इतना सुन कर मै दहाड़ा, चिल्लाया,मगर बेलन का ख्याल  करके 

आगे से एक शेर ही सुनाया.

वैसे तो अपना कोई सानी नही है,

लेकिन जहां अपनी नाव डूबी,वहां पानी नही है. 

इतना सुन पहले तो मेरी बीवी घबराई,
फिर मेरे पास आई,
बोली ?????????
ये बताओ आप ने बिना पानी के नाव कैसे डुबाई.
आगे से मैंने कहा ??????
जिस देश में हो घोटालों का बोलबाला,
झूठे का मुँहू सफेद सच्चे का मुँहू काला।
जहां हर तरफ सिर्फ पैसे का खेल हो,
बेईमान छूटे ईमानदार को होती जेल हो।
जहां देर से चलती रेल हो,
जो मेल हो वो भी बेमेल हो।
जहां पढ़ा लिखा मतलब के लिए अनपढ़ के पैरों में माथा टेकता हो,
नेता सदन में बैठा सो रहा या फ़िल्में देखता हो।
जहां माँ इंसाफ के लिए लड़ती हो,
और बेटी पेट में ही मरती हो।
वहां क्या नही हो सकता।
यहां तो घोटाले ही बड़े हैं,
तुम एक छोटी सी किश्ती की बात करती हो,
देश में तो बड़े बड़े जहाज बिना पानी डूबे खड़े है।
इस लिए शोर न मचा,
चार दिन की जिंदगी हंस खेल के बिता।
वरना पछताएगी, रो रो के गाये गी।
छोड़ गये बालम हाय अकेला छोड़ गये.रैना"



जिंदगी को पल भर आराम नही देता,
पीने को इसे नाम का जाम नही देता,
"रैना"टूट जाती है जब जीवन की डोरी,
तब सोना चांदी पैसा काम नही देता। रैना"

Monday, April 13, 2015

ज्ञान का दीप जला दे भाई,
अपने बच्चों को पढ़ा दे भाई।
वरना दीवारे गिर जाये गी,
नींव तो मजबूत बना दे भाई।
दूर हैं मंजिल रास्ता मुश्किल,
आसान सी राह बता दे भाई।
चार दिन बाद बिछुड़ जायेगे,
बीच की दीवार गिरा दे भाई।
यहां न कोई तेरी सुनने वाला,
हाले दिल उसको सुना दे भाई।
रैना"तो हरपल दिन को तरसे,
तू इन दोनों को मिला दे भाई। रैना"
इतनी कृपा करो मेरी माता मैं तेरा ही ध्यान लगाऊ,
सदा नेक ही रास्ते पर चल कर अपना फर्ज निभाऊ।
इतनी कृपा करो ------------
फैला घोर अँधेरा माँ काला,मेरे मन में करो माँ उजाला,
मेरी आँखों के फ्रेम में सजे माँ तेरा प्यारा रूप निराला,
लिखू भजन तेरे माँ गा कर मैं अपना मन बहलाऊ।
इतनी कृपा करो ------------------रैना"
सुप्रभात जी ----------------जय जय माँ 

Sunday, April 12, 2015

रैना"ये मत पूछो यहां के वहां है ,
उसकी कृपा से ही रोशन जहाँ है,
खुशियों की बरसात कृपा करती,
रहमत करने वाली वैष्णो माँ है। रैना"
सुप्रभात जी ------जय जय माँ



भूल चुके है सब फर्ज क्या है,
फिर तुझे भूलने में हर्ज क्या है। 

मेरी आप बीती कहानी मेरी जुबानी
 महाकवि गिरोह का सरदार
एक कवि मित्र मेरे पास आये,
बड़े अदब से फरमाये।
मुझे पता चला आप निराश हो,
आजकल बहुत ही उदास हो।
क्योकि कोई तुम्हे अपने गिरोह में न मिलाता है,
कभी भी किसी कवि सम्मेलन में न बुलाता है।
मैंने आगे से कहा हाँ अंतर्यामी ज्ञानी ध्यानी,
वास्तव में मुझे यही है विकट परेशानी।
यही तो  है मुझे भयंकर पीड़ा,
शांत नही होता मेरे मन का कीड़ा।
 ये तो सत्य है जब तक कवि किसी को कविता न सुनाता है,
उसे जरा चैन न आता है यदि दो चार लोग  कविता सुन ले,
तो कवि का चार किलो खून बढ़ जाता है।
आगे से कवि मित्र बोला अरे नादान,
क्या तू इसलिए है परेशान,
इस परेशानी का मेरे पास समाधान,
इस मुश्किल को हल करेगा आसान,
कवि गिरोह का सरदार महाकवि घमासान,
बस तुम्हे देना पड़ेगा थोड़ा सा दान।
 इसमें क्या है जो गुरू दीक्षा देते है ,
 वो सारे ही दान लेते। है
इसमें काये का अपमान,
दान देना तो कार्य महान।
कवि मित्र की बातें सुन मुझे हुआ आत्म ज्ञान,
महाकवि सरदार से मिलने को मैंने किया प्रस्थान।
मैं महाकवि घमासान के पास आया,
घमासान ने हमें देखकर पूरा घमासान मचाया। 
हमें देख कर पहले वो मुस्कराया,
फिर उसने जोर से ठहका लगाया,
तत्पश्चात प्यार से फ़रमाया,
सुना है बरखुरदार तू कवियों का है सताया,
आजतक तुझे किसी ने हाथ नही पकड़ाया। 
लेकिन ये महाकवि कवि गिरोह का सरदार तुम्हे नया जलवा दिखायेगा,
तुझे किसी ने हाथ नही पकड़ाया मगर महाकवि तुझे पूरी बाजू पकड़ायेगा। 
मगर पहले तू कोई अपनी कविता सुना,
सरदार का मन बहला। 
मैंने झट तड़कती फड़कती कविता सुनाई,
सरदार के मन भायी फिर सरदार ने दरिया दिली दिखाई। 
मुझे सीने से लगा लिया,
और सौ का नोट थमा दिया। 
मैं फूल कर हो गया कुप्पा,
मुझे न खबर थी बकरे को हलाल करने की तैयारी कर  रहा है फुफ्फा। 
मैंने कविता सुना सुना कर मन के सारे गुबार निकाल दिये,
महाकवि के सामने हथियार डाल दिये। 
महाकवि घमासान ने फिर मेरा हौसला बढ़ाया,
पास बैठा कर बड़े प्रेम से समझाया। 
हम महाकवि बोला हम तुम्हे बहुत बड़ा कवि बनायेगे,
कवि ही नही बनायेगे साथ में मोटी कमाई भी करवायेगे।
मैं मन में सोचने लगा कवि और कमाई,
इन दोनों का मेल कभी नही होता भाई। 
फिर मैंने सोचा ये महाकवि है कुछ चक्कर चलाता ही होगा,
अपने साथ लगने वाले कवियों की कमाई करवाता ही होगा। 
मुझ से मुखातिव हो कर महाकवि बोला?/
तुम्हे बस इतना करके दिखाना है,
एक उच्चकोटि का कवि सम्मेलन करवाना है। 
इस कवि सम्मेलन में हम दस कवियों को बुलायेंगे,
उनके हाथ में पांच पांच थमायेगे वो मेरे चेले है मान जायेगे। 
हमने आप से कुछ नही लेना,
हम आप के गुरू है इक पगड़ी और 11 हजार दे देना। 
ध्यान करो इस कवि सम्मेलन में आप मात्र 61 हजार लगायेगे,
इस के बदले कई लाख कमायेगे। 
लाख की बात सुन मेरी लार टपकने लगी,
आँखे चमकने लगी। 
मैं सोचने लगा ऐसे ही मैं साल में चार पांच कवि सम्मेलन करवाऊगा,
मजे में पांच सात लाख रूपये कमाऊगा। 
लोग कहते है कवि भूखे मरते है,
कुछ ही वर्षों मैं तो करोड़ पति बन जाऊगा। 
ऐसा करके कवि को निखटू कहने वालो के मुँहू पर ताला लगाउँगा। 
ये सोच कर मन खुश हुआ हवा का ठंडा झोंका आया हम सो गये,
महाकवि ने हमारे कंधे पे हाथ मारा और पूछा जनाब कहाँ खो गये।
मैंने कहा नही जी हमने कहाँ खोना है,
हम तो सोच रहे थे कवि सम्मेलन कैसे होना है। 
महाकवि बोले आप चिंता न करो  के यहां चार दिन पहले ही डेरा लगा लेंगे,
तुम पैसों का इंतजाम करवा लेना कवि सम्मेलन तो हम खुद ही करवा लेंगे। 
मैं सोचने लगा अरे भाई,
लक्ष्मी खुद चल के घर है आई। 
मैंने फिर जरा देर न लगाई,
महाकवि के सामने हाँ में गर्दन हिलाई। 
मैं ख़ुशी ख़ुशी लौट के घर आया,
अपनी पत्नी को सारा विर्तांत सुनाया। 
सुन बीवी दहाड़ी चिल्लाई,
बोली तूने खुद को लुटवाने की नै योजना है बनाई। 
मैं कहा नही मुझे अब समझ है आई,
रैना पहली बार करेगा मोटी कमाई। 
मेरी बातें सुन मेरी बीवी हारी,
मैंने कवि सम्मेलन की कर ली तैयारी। 
महा कवि ने जरा तरस न खाया,
पूरे एक लाख में टिकाया। 
मैं फिर भी न घबराया,
मैंने सोचा चलो कमाने का साधन है बनाया। 
अगले दिन मैंने महाकवि को फोन मिलाया,
वो आगे से बोला कौन बोल रहा है भाया। 
 मैं आगे  से बोला मैं रैना हिंदुस्तानी,
वो आगे से बोला हम कौन से है पाकिस्तानी। 
मैंने कहा गुरु देव आप ने कवि सम्मेलन के बारे बताना था,
वो बोले कैसे बताते तेरे जैसे नये चेले ने आना था,
उसने भी तेरी तरह कवि सम्मेलन करवाना था। 
वही तुझे बुलवाना था। 
मैं तैश में आ गया बोला क्या आप ऐसे ही चक्कर चलाते हो। 
नये मुर्गों को फसाते हो। 
महा कवि गुस्से में आ गया बोला तू अक्ल का अँधा,
तू कवि सम्मेलन को समझता है धंधा। 
मैंने आगे से कहा जो आप ने मुझे कहा था वो क्या था फंडा। 
महाकवि आगे से चिल्लाया मैं तेरा गुरु हूँ मुँहू को लगा ले ताला,
महा कवि का उपदेश सुन मैं चुप रह गया,
एक लाख का दर्द भी सह गया। 
मगर मैं इतना समझा कुछ कवि ऐसा ही चक्कर चलते है,
उभरते कवियों को मुर्ख बनाते है उन्हें कविता से दूर हटाते है। 
ऐसे कुछ कवि कविता की इज्जत का करते हनन,
उभरते कवियों का करते दमन। 
ये कवि नही पखंडी है,
दुष्ट आत्मा शिखंडी है। 
रैना"का बस इतना ही कहना,
ऐसे कवियों से बच के रहना।रैना"