उसके दर पे सिर झुकाने की जरूरत क्या है,
जब वो समझता ही नही मोहब्बत क्या है,
गर उसको गुमां हो गया है अपनी हस्ती का,
एहसास करवा दो उसे रैना"उल्फ़त क्या है। रैना"
तेरी अदाओं ने तुझे मशहूर कर दिया है,
ऐसा भी लगता कभी मगरूर कर दिया है,
हम तो हरदम तेरी खुशामत में लगे रहते,
पर तूने रैना"से खुद को दूर कर दिया है।रैना"
चिराग को जला के खुले आँगन में रख दो,
देखते है हवा से कितनी देर टकराता है। रैना"
जब वो समझता ही नही मोहब्बत क्या है,
गर उसको गुमां हो गया है अपनी हस्ती का,
एहसास करवा दो उसे रैना"उल्फ़त क्या है। रैना"
तेरी अदाओं ने तुझे मशहूर कर दिया है,
ऐसा भी लगता कभी मगरूर कर दिया है,
हम तो हरदम तेरी खुशामत में लगे रहते,
पर तूने रैना"से खुद को दूर कर दिया है।रैना"
चिराग को जला के खुले आँगन में रख दो,
देखते है हवा से कितनी देर टकराता है। रैना"
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