न जाने लोगो की क्या मजबूरी होती,
जुगनू से उल्फ़त आफताब से दूरी होती,
आखिर ये लोग क्यों नही समझ पाते हैं,
चमकने को आफ़ताब की लौ जरूरी होती। रैना"
जुगनू से उल्फ़त आफताब से दूरी होती,
आखिर ये लोग क्यों नही समझ पाते हैं,
चमकने को आफ़ताब की लौ जरूरी होती। रैना"
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