Monday, April 6, 2015

ह्म् सफर मेरे हम स़फर ,
उम्र भर मेरे साथ चल,
है सिर्फ़ यही एक आरज़ू,
साथ कटे यह राह गुजर .
जब चले कभी आधिया,
फिर बादलों से घिरे चमन
तो भूला न देना मुझे,कभी तुम,
ज़िदगी कि राह् में ,जब कभी हो फ़ासले,
और मन में बढ़े उलझने ,
पर दूर ना हो होसले
साथ चलने के उमर भर

हमसफ़र मेरे हमसफ़र
मुश्किल जीवन की डगर,
तुम अगर मेरे साथ हो,
मजे में कटेगा ये सफर। 
पास होकर भी दूर हो,
क्यों सनम मजबूर हो,
हम भी इतना जानते,
कुछ लगते मेरे जरूर हो। 

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