Wednesday, April 22, 2015

तन्हा तन्हा जिंदगी का सफ़र,
अपनी भी कोई रहती न खबर।
लफ्जों से हरपल खेलते रहना,
कर देना सब उसके ही नज़र।
महफ़िल में एहसासे तन्हाई,
होने लगे जब शायरी का असर।
मन में उलझन बैचनी रहती,
किसी के दीद को तरसे नजर।
इतनी आसां नही मंजिल पाना,
मुश्किल बहुत इश्क की डगर।
आइना कहता देख मेरी हालत,
सुन रैना"अब तू खुद भी संवर। रैना"  

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