Tuesday, April 7, 2015

मेरी आप बीती कहानी मेरी जुबानी
 महाकवि गिरोह का सरदार
एक कवि मित्र मेरे पास आये,
बड़े अदब से फरमाये।
मुझे पता चला आप निराश हो,
आजकल बहुत ही उदास हो।
क्योकि कोई तुम्हे अपने गिरोह में न मिलाता है,
कभी भी किसी कवि सम्मेलन में न बुलाता है।
मैंने आगे से कहा हाँ अंतर्यामी ज्ञानी ध्यानी,
वास्तव में मुझे यही है विकट परेशानी।
यही तो  है मुझे भयंकर पीड़ा,
शांत नही होता मेरे मन का कीड़ा।
 ये तो सत्य है जब तक कवि किसी को कविता न सुनाता है,
उसे जरा चैन न आता है यदि दो चार लोग  कविता सुन ले,
तो कवि का चार किलो खून बढ़ जाता है।
आगे से कवि मित्र बोला अरे नादान,
क्या तू इसलिए है परेशान,
इस परेशानी का मेरे पास समाधान,
इस मुश्किल को हल करेगा आसान,
कवि गिरोह का सरदार महाकवि घमासान,
बस तुम्हे देना पड़ेगा थोड़ा सा दान।
 इसमें क्या है जो गुरू दीक्षा देते है ,
 वो सारे ही दान लेते। है
इसमें काये का अपमान,
दान देना तो कार्य महान।
कवि मित्र की बातें सुन मुझे हुआ आत्म ज्ञान,
महाकवि सरदार से मिलने को मैंने किया प्रस्थान।
शेष अगले अंक में "मेरी आप बीती ---------रैना"


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