खुदा जाने आशियां किधर होगा,
पत्ता टूटा फिर शुरू सफ़र होगा।
हवा की मर्जी ले जायेगी जिधर,
अन्धेरों में लौ का जिकर होगा।
अदालत में उसकी हाजरी होगी,
जज ही जाने क्या हशर होगा।
मतलबी दुनिया की ये फितरत,
तिरे बाद मतलब को ज़िकर होगा।
रैना"उसको तो पीड़ा सहनी होगी,
मकसदे जिंदगी से जो बेखबर होगा। रैना"
पत्ता टूटा फिर शुरू सफ़र होगा।
हवा की मर्जी ले जायेगी जिधर,
अन्धेरों में लौ का जिकर होगा।
अदालत में उसकी हाजरी होगी,
जज ही जाने क्या हशर होगा।
मतलबी दुनिया की ये फितरत,
तिरे बाद मतलब को ज़िकर होगा।
रैना"उसको तो पीड़ा सहनी होगी,
मकसदे जिंदगी से जो बेखबर होगा। रैना"
No comments:
Post a Comment