Wednesday, April 8, 2015

आदरणीय श्री Alok Mittalजी की अध्यक्षता में ।।।

मेरी आप बीती कहानी मेरी जुबानी का अगला भाग 
मैं महाकवि घमासान के पास आया,
घमासान ने हमें देखकर पूरा घमासान मचाया। 
हमें देख कर पहले वो मुस्कराया,
फिर उसने जोर से ठहका लगाया,
तत्पश्चात प्यार से फ़रमाया,
सुना है बरखुरदार तू कवियों का है सताया,
आजतक तुझे किसी ने हाथ नही पकड़ाया। 
लेकिन ये महाकवि कवि गिरोह का सरदार तुम्हे नया जलवा दिखायेगा,
तुझे किसी ने हाथ नही पकड़ाया मगर महाकवि तुझे पूरी बाजू पकड़ायेगा। 
मगर पहले तू कोई अपनी कविता सुना,
सरदार का मन बहला। 
मैंने झट तड़कती फड़कती कविता सुनाई,
सरदार के मन भायी फिर सरदार ने दरिया दिली दिखाई। 
मुझे सीने से लगा लिया,
और सौ का नोट थमा दिया। 
मैं फूल कर हो गया कुप्पा,
मुझे न खबर थी बकरे को हलाल करने की तैयारी कर  रहा है फुफ्फा। 
मैंने कविता सुना सुना कर मन के सारे गुबार निकाल दिये,
महाकवि के सामने हथियार डाल दिये। 
शेष भाग पेश करेंगे आगे ---------रैना"

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