और किसी को नही फ़िक्र मेरी,
सिर्फ मौत करती है इंतजार मेरा। रैना"
फूल तो सूख गये है मगर,
किताबों से अब भी यादों की खुशबू आती है। रैना"
समारोह _ 26 __
बुधवार __ गुरुवार __ छंदमय // मुक्तक आयोजन __
आदरणीय श्री सुनील कुमार नवोदित जी को प्रस्थापित..
कैद कमरों में कभी रहता नही,
देखता सब कुछ मगर कहता नही,
सोच लो तन्हा कभी मैं कौन हूं,
साथ में हरपल कभी बहका नही।रैना"
सिर्फ मौत करती है इंतजार मेरा। रैना"
फूल तो सूख गये है मगर,
किताबों से अब भी यादों की खुशबू आती है। रैना"
समारोह _ 26 __
बुधवार __ गुरुवार __ छंदमय // मुक्तक आयोजन __
आदरणीय श्री सुनील कुमार नवोदित जी को प्रस्थापित..
कैद कमरों में कभी रहता नही,
देखता सब कुछ मगर कहता नही,
सोच लो तन्हा कभी मैं कौन हूं,
साथ में हरपल कभी बहका नही।रैना"
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