Sunday, April 5, 2015

आकाश सागर जमीं तेरे क्या कहने
तेरा हर जलवा हसीं तेरे क्या कहने,
बिखरे रंग कई महकता है गुलशन,
कोई भी कमी न कहीं तेरे क्या कहने।रैना"


मेरे लिये कोई आहें क्यों भरेगा,
मुझ बदनसीब को याद क्यों करेगा।

खमोशी मेरी फितरत है,
उदासी से मुझे उल्फ़त है,
इश्क हकीकी करने लगा,
उससे मुझे मोहब्बत है। रैना"

मय ओ मैखाने से अपना कोई वास्ता नही,
गमगस्त करने के लिये चाय का सहारा लेते है। रैना"



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