Friday, April 24, 2015




हम तेरे शहर में आये हैं भटकने के लिये,
सिर्फ चिंता की फांसी पे लटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -------------------------
राह से अनजान है हम न मंजिल का पता,
बांहें फैलाये खड़ी देख के मुस्कराये खता,
लाखों तैयार हुई कलियाँ चटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -----------------------
रिश्तें नीलाम हुये हैं इमान मंडी में बिके,
ऐसा वो दिल ही नही जैसा खूब चेहरा दिखे 
रोना है तन्हा को यार सब मटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -----------------------------
खूब हसीन होता तब मंजर जब वो शाम ढ़ले,
छोड़ के झूठ की दुनिया पंछी जब घर को चले,
इतने मायूस हुये आंसू न बचे टपकने के लिये। 
हम तेरे शहर में -------------------------------
खाये हैं धोखे बहुत खुद पे भी भरोसा न रहा,
रैना"की क्या बात करू जैसा था वैसा न रहा,
बेहतर होगा दे दे उसे जहर तू घटकने के लिये। रैना"




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