Friday, April 24, 2015

हम तेरे शहर में आये हैं भटकने के लिये,
सिर्फ चिंता की फांसी पे लटकने के लिये।
हम तेरे शहर में -------------------------
राह से अनजान है हम न मंजिल का पता,
बांहें फैलाये खड़ी देख के मुस्कराये खता,
लाखों तैयार हुई कलियाँ चटकने के लिये।
 हम तेरे शहर में -----------------------


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