Thursday, April 9, 2015

दोस्तों पढ़ना पर थोड़ा सोचना भी 

 कभी तेरे बारे में सोचा नही है,
क्योकि सोचा हुआ होता नही है। 
फिर भी दिल को है तलब तेरी,
क्योंकि मैंने दिल को रोका नही है।
सुना दीवारों के भी कान होते हैं, 
इसलिये खुद से कभी पूछा नही है। 
बेशक वो तो गल्त रास्ते पे जाता,
जिसने भी खुद को टोका नही है।
दूसरों के घरों में झांकता अक्सर,
अपने घर का किया मौका नही है।
"रैना"ने कर ली उससे चार आँखे,
रतजगा करता अब सोता नही है। रैना"   

No comments:

Post a Comment