दोस्तों हम सब के लिए कुछ ख़ास
तीन घण्टें की जिंदगानी है,
पहला पचपन,दूसरा घण्टा जवानी है,
तीसरा बुढ़ापा,शाम ढल जानी है।
जिंदगी की यही कहानी है।
उसकी मर्जी से आनी जानी है।
पांच तत्वों से बना पुतला,
आकाश धरती अग्नि हवा पानी है।
कहने को यहां सारे अपने,
सच ये हर शै गैर बेगानी है।
जानता ये घर नही अपना,
रैना"फिर भी करता नादानी है।रैना"
शुभ सांध्य -----जय जय माँ
तीन घण्टें की जिंदगानी है,
पहला पचपन,दूसरा घण्टा जवानी है,
तीसरा बुढ़ापा,शाम ढल जानी है।
जिंदगी की यही कहानी है।
उसकी मर्जी से आनी जानी है।
पांच तत्वों से बना पुतला,
आकाश धरती अग्नि हवा पानी है।
कहने को यहां सारे अपने,
सच ये हर शै गैर बेगानी है।
जानता ये घर नही अपना,
रैना"फिर भी करता नादानी है।रैना"
शुभ सांध्य -----जय जय माँ
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