जिन्दगी से बस निभाने की सोचते हो,
यहां से ईंट उठा वहां लगाने की सोचते हो,
दूसरे पर क्या गुजरेगी तुम्हे क्या लेना,
तुम तो अपनी खाल बचाने की सोचते हो। रैना"
सहर की तलब में अंधेरों से दोस्ती कर ली,
आशिकों का क्या जब चाह बंदगी कर ली।
अपने आप से लड़ते रहेंगे हम,
तमाम उम्र इबादत
यहां से ईंट उठा वहां लगाने की सोचते हो,
दूसरे पर क्या गुजरेगी तुम्हे क्या लेना,
तुम तो अपनी खाल बचाने की सोचते हो। रैना"
सहर की तलब में अंधेरों से दोस्ती कर ली,
आशिकों का क्या जब चाह बंदगी कर ली।
अपने आप से लड़ते रहेंगे हम,
तमाम उम्र इबादत
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