Thursday, April 9, 2015

रुखसत हो जायेगे आयेगे न ख्वाबों में,
ढूंढा करोगे फिर तुम हमें किताबों में। रैना"

मैं लिखता नही लिखवाने वाला कोई और है,
मोती- ए- अल्फाज सजाने वाला कोई और है,
मैं गुमां कैसे करू भला मेरी क्या औकात है,
मेरे दिमाग की कलम चलाने वाला कोई और है। "रैना"

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