Saturday, April 4, 2015

सजी है महफिलें रंगिनिओं के मंजर भी,
ख़ुशी करवट ले रही है मन के अंदर भी। बहुत भटके हम तेरी तलाश में अब तलक, कई बार छलके है आंखों के समंदर भी। 
शहर में चर्चे है अब मेरी ही बदहाली के,
इक मैं ही नही इश्क में तड़फे पैगम्बर भी। हर चीज बिकती है बदले इस माहौल में,
पैसे के दम से मिले मस्जिद ओ मंदिर भी। रोज़ ही करते है सिर्फ तुझको याद हम,
रीनू ने लिखा दिल पे तेरा नाम,नंबर भी।रीनू"

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