Monday, July 13, 2015

लोग तेरे शहर के,अब बड़े सयाने हो गये,
पैर जमीं पे न रखे,खाने को दाने हो गये।
वादे कसमें भूल के,प्यार मतलब से हुआ,
हाल से बेहाल हुये,खुद से बेगाने हो गये।
बेवफा इस दौर में,रिश्ते बिखरे टूट कर,
साथ चलते भाई भाई,देखे जमाने हो गये।
दहेज लोभियों से डरे,अजंमी की दे बली,
साध कौन चोर है,यहां सारे काने हो गये।
आम चाहे खास है रुतबा कम हो गया,
साकी भी है दुखी  घर घर मैखाने हो गये।
रैना क्यों परेशान है चल अपने घर चले,
शहर छोडऩे के अब कई बहाने हो गये। रैना

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