ग़ज़ल
भला क्यों तिरा घर नही मिल रहा है,
शमा की तरह दिल मिरा जल रहा है।
नही इश्क की राह आसां समझ ले,
बिना देख कर तू किधर चल रहा है।
मुहब्बत निकम्मा करे जान ले तू,
बना जख्म नासूर दिल जल रहा है।
न अफसोस कोई कमी है हमारी,
खिज़ा में पला गुल नही खिल रहा है,
सुनाये किसे दर्द दिल की कहानी,
लगा जख्म रैना नही सिल रहा है। रैना
भला क्यों तिरा घर नही मिल रहा है,
शमा की तरह दिल मिरा जल रहा है।
नही इश्क की राह आसां समझ ले,
बिना देख कर तू किधर चल रहा है।
मुहब्बत निकम्मा करे जान ले तू,
बना जख्म नासूर दिल जल रहा है।
न अफसोस कोई कमी है हमारी,
खिज़ा में पला गुल नही खिल रहा है,
सुनाये किसे दर्द दिल की कहानी,
लगा जख्म रैना नही सिल रहा है। रैना
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