Tuesday, July 21, 2015


        ग़ज़ल
इसलिये तो आंख नम है,
बेवफा मेरा सनम है,
भूल बैठा वो मुझे भी,
जिन्दगी को खास गम है।
सोच सकते ये नही हम,
क्यों इनायत प्यार कम है।
टूट कर दिल चूर बिखरा,
क्यों नही निकला ये दम है।
याद तेरी बावफा है,
बेवफा रैना"यही गम है। रैना"


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