हर किसी से पूछते हो तेरा ख्याल क्या है,
तूने कभी खुद से पूछा है तेरा हाल क्या है। रैना"
हम तो लफ्जों के दरिया में बहते है,
लिखते नही अपने दिल की कहते है। रैना"
टूट कर बिखर रहे उन धागों को जोड़ कर,
भारत माँ सपूत चला गया दुनिया छोड़ कर,
मालिक अब्दुल कलाम जी को लेना शरण में,
रैना"तुझसे विनती करता है हाथ जोड़ कर। रैना"
तूने कभी खुद से पूछा है तेरा हाल क्या है। रैना"
हम तो लफ्जों के दरिया में बहते है,
लिखते नही अपने दिल की कहते है। रैना"
टूट कर बिखर रहे उन धागों को जोड़ कर,
भारत माँ सपूत चला गया दुनिया छोड़ कर,
मालिक अब्दुल कलाम जी को लेना शरण में,
रैना"तुझसे विनती करता है हाथ जोड़ कर। रैना"
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