Wednesday, July 15, 2015


 ये तो सब हैं मानते नारी अति महान है,
फिर भी यहां नारी का हो रहा अपमान है।
नारी की तपस्या त्याग किसी से न छिपी,
घर की ख़ुशी के खातिर हो जाती कुर्बान है।
कुदरत का कसूर है या जमाने की खता,
तंगहाली में जी रही लक्ष्मी भाग्यवान है।
आज़ादी से जीने वाली गिनती की दो चार,
हो रहे अत्याचार से नारी बहुत परेशान है।
घर की चारदीवारी में बेचारी अब भी कैद है,
कहा तो जाता नारी घर की इज्जत शान है।
आधी आबादी मजबूर है फिर भी आगे बढ़ी,
आसमान छूने का रीनू" कायम अरमान है। रीनू "

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