Friday, July 10, 2015

ये दर है वैष्णो रानी का,
महारानी जग कल्याणी का,
यहां मुंह मांगी मुराद मिलती है,
मन की मुरझाई कली खिलती है।
माँ भेद भाव न करती है,
दर आये की झोली भरती है।
माँ के दर पे रहमत बरसे है,
कोई मन न प्यासा तरसे है।
माँ बच्चों से है प्यार करे,
उद्धार करे माँ उपकार करे।
जो बन के भिखारी दर आता है,
उसका जीवन सफल हो जाता है।
फिर रैना"क्यों परेशान है तू,
परेशान है तू क्यों हैरान है तू।
तन मन अर्पण कर दे तू,
माँ के चरणों में समर्पण कर दे तू।
फिर देखना कैसी बहार आये,
चारों दिशाओं से माँ का प्यार आये। रैना"
सुप्रभात जी -----------जय जय माँ

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