Sunday, July 19, 2015

माँ मेरी वैष्णो रानी के, अन्दाज अलग न्यारे है,
चाँद सूरज सजिदा करते, दर देव देवा खड़े सारे है,
माँ मेरी मेहर करती अपने भक्तों के भाग्य संवारे है,
माँ वैष्णो दौड़ी दौड़ी चली आती भक्त जब पुकारे है। रैना"
सुप्रभात जी -----------------------जय जय माँ




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