Wednesday, July 29, 2015

हम तेरे दरबार में आये है माँ,
बिगड़ी बनाने के लिये,
हम बच्चों को, माँ वैष्णो तेरा सहारा दे दे,
तेरे दीद को तड़फ रही अखियां,
तड़फती आँखों को, मस्त नजारा दे दे।
हम तेरे दरबार में ---------------
न हमें राह का पता,न हमें मंजिल का पता,
मझदार में भटक रहे, हैं न साहिल का पता,
पार लग जाये सफीना, मेरी माँ इशारा दे दे।
हम तेरे दरबार में----------------
माँ रैना"परेशान बहुत, परेशां दुखी हैरान बहुत,
गम का शहर दुनिया,दुनिया से अनजान बहुत,
वरना भटक जायेगा वैष्णो माँ उसे किनारा दे दे।
हम तेरे दरबार पे ---------------रैना"
सुप्रभात जी ----------------------जय जय माँ


No comments:

Post a Comment