Saturday, July 11, 2015

बीच गुफा में आसन है,बैठी वैष्णो महारानी है,
अखंड ज्योति निरंतर जलती,बहता चरणों में पानी है।
अखंड ज्योति निरंतर जलती ------------
लिख भेज के चिठ्ठियां माँ, भक्तों को बुलाती है,
दर भक्तों को देख माता, मद मद मुस्काती है,
जग कल्याणी माँ वैष्णो, भक्तों की दीवानी है।
अखंड ज्योति निरंतर जलती -------------
रहा कामों में उलझा रैना,तूने कर दी क्यों देरी है,
बुला रही माँ वैष्णो रानी,दर्श की बारी जो तेरी है ,
हो जाये कल्याण तेरा,क्यों करता नादानी है।
अखंड ज्योति निरंतर जलती ---------रैना"
सुप्रभात जी -------------------जय जय माँ


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